कलयुगी रामायण

एक सांझ यूँही चलते हुए
ज्यूँ राम मंदिर के पास गया
विचित्र सा एक ख्याल मन में आया
धर्मं कि रक्षा की खातिर
पुरषोत्तम ने था बाण चलाया
क्या कलयुग में ये पाप हो जायेगा?
क्या रामायण का सत्य-रक्षार्थी राम
हिंसा का प्रेमी कहलायेगा?’

ज़रा सोंच के देखो उस वक़्त को तुम
क्या होता रामायण का इतिहास
अगर तरकश रख श्री राम भी कहते
'हे लंकापति मेरी बात तू सुन
सीते से वियोग मैं सह पाउँगा
इज्जत से वापस कर दे वरना
अनशन पर मैं फिर बैठ जाऊंगा'

होता क्या फिर अंत कथा का?
रावण का क्या हृदय पिघलता?
चार युगों के इतिहास में मैंने पाया
हाल यही है भारतवर्ष का
सत्यसे वाकिफ हैं सभी
फिर है इतनी सच्चाई यहाँ?
क्य इस युग रावण वध भी
अब मानवता पे है दुहाई यहाँ?

मानो पुनः जनम हुआ राम का
असत्य और अधर्म पे 'बाण' तो वो चलाएगा
बस एक सवाल रह गया है दिल में
क्या इस पापी कलयुग में
पावन-न्याय प्रेमी राम भी
हिंसा का प्रेमी कहलायेगा?

है एक सवाल आपसे बस ये
पाबन्दी लगी अगर राम पे
तब आगे कौन आएगा?
कौन बनेगा हनुमान वो
जो इस 'लंका' में आग लगाएगा?

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