ये खामोश नज़र

तेरी आरज़ू, तेरी जुस्तज़ू, तेरा सपना
सब बयां करती ये खामोश नज़र
तेरी चाहत, तेरी मुह्हबत, तेरी कामना
सब बयां करती ये खामोश नज़र

बादलों के बीच, उस शुन्य में कुछ ढूंढती नज़र
खामोश हैं लब पर बोलती नज़र
अपलक निहारती, सौ सवाल करती
अपनी मासूमियत को खुद बयां करती ये नज़र

कुछ सोंचती, कुछ मांगती, कुछ उम्मीद करती ये नज़र
अपने-पराये के भेद को मिटती ये नज़र
चाहती कुछ ढूंढना, कुछ खोजना, कुछ पाना
हर पल, हर लम्हा बोलती ये नज़र

उम्र के साथ जवान होती ये नज़र
प्यार, मुह्हबत और चाहत को दिखलाती ये नज़र
नयी उमंगें, नए तरंगे, नए रस्ते खोजती
हर वक़्त कुछ नया चाहती, ये जवान होती नज़र

हर पल कुछ ढूंढती, कुछ तलाशती ये नज़र
दिल में जो सोंचती, सब बयां करती नज़र
किसी पर मर मिटने की कसम खाती
चाँद तारे तोरने और आसमा झुकाने को सोंचती ये नज़र

समय के साथ हकीकत को पहचानती ये नज़र
धुंधली साँझ के छाए में नए सपने बुनती ये नज़र
अमावस्या की घोर अँधेरी रात में
पूनम की रौशनी खोजती ये नज़र

लब हैं खामोश फिर भी
हर एहसासों को बयां करती, ये नज़र

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